रणकार

एक मिनट. घडी़ की निरंतर चलती टिकटिक में एक मिनट का समय कितना छोटा सा है! या फिर कितना लंबा है? वैसे तो समय अपने आप में कभी छोटा या लंबा नहि होता है. समय को जीने वाले की समय के बारे में सोच-समज़ ही समय की लंबाई, गहराई या उसकी कमी तय करती है. किसी किसी को बहूत ही छोटी उम्र में जिंम्मेदारीओं का एहसास हो जाता है. किसी किसी को बार बार टोकीए, कहीए और पानी की तरह कईं वर्ष बीत जाए फिर भी जिम्मेदारी का ज तक समज़ में नहि आता. ईन दो प्रकार की व्यक्तिओं में से पहले के लिए बीत रहा हर एक पल अमूल्य है तो दूसरे प्रकार की व्यक्ति के लिए बीत रहा वर्ष भी सस्ते में जान छूटी जैसा भाव रखता है. जब हम मनपसंद प्रवॄत्ति करते है तब कितना भी समय कम पडता है और जो मनपसंद नहि है वैसी प्रवॄत्ति करते है तब हर एक पल बोज़ सी लगती है. तभी तो एक मिनट कहीं पूरे भव के जितना महत्त्व रखती है तो कहीं अनचाहा भाव. अपने एक मिनट के महत्त्व को हर ईन्सान ने खुद ही निश्चित करना पडता है. ये महत्त्व घडी से, घटना से किसी और बात से कभी निश्चित नहि हो सकता. “एक मिनट…” बस ईतनी आवाज़ सुनाई दे उतने में ये बात स्पष्ट हो जानी चाहिए कि अगर चाहे तो सिर्फ एक मिनट में सारे जीवन की कहानी को बदल दिया जा सकता है. अगर एक मिनट को यूं ही खर्च कर दिया और सच्चे मन से अफसोस, पश्चाताप प्रतीत किया तो निर्णय भी कर लेना चाहिए कि एक मिनट खो देने की यह बडी़ गलती आखरी बार कर दी. क्यूं कि एक मिनट आप की गुलाम नहि है और आपकी ईच्छा से रूक जाए ईतनी लाचार भी नहि है. पर हां, उसका सम्मान कर सको तो वो आपके कदमों में माथा टेक देगी दुनिया में आपका नाम रोशन भी कर देगी. निर्णय आप ही को लेना है. आपको घडी़ की सिर्फ टिकटिक सुनाई दे रही है या फिर अनमोल एक मिनट?

- संजय वि. शाह ‘शर्मिल’

VN:F [1.9.10_1130]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
VN:F [1.9.10_1130]
Rating: 0 (from 0 votes)
Related Posts with Thumbnailspixelstats trackingpixel