रणकार

संजय वि. शाह

नदी कभी अपना पानी पीती नहि है. ना कभी कोई वृक्ष अपने ही उगाए फल खाता है. बारिश जो दाने उगाती है उसे कभी मांगती नहि. ये सब वो दानवीर है जो सिर्फ देना जानते है और बदले में कुछ पाने की आशा रखते नहि है. सच्चे धनवान भी वो ही लोग है जिनका पैसा खुद के भोगविलास के लिये नहि पर दूसरों के कल्याण के लिये खर्च करे. आखिर सबकुछ खुद के लिये किया भी तो जीवन में क्या किया?

बचपन की बात लेते है. दो निर्दोष बालक कईं बार प्रगाढ मित्र होते है. लेकिन दो पुख्त लोगों के बीच में नि:स्वार्थ और निष्कपट मित्रता जल्दी से नहि होती. मानो कि बुद्धि आने के बाद उसमें कईं बदी आ जाती है. दोस्ती का नाम ही है बिना किसी मतलब के एक-दूसरे के होना. लेकिन इन्सान का स्वभाव ही ऐसा है कि उसे बिना कुछ पाए कुछ देना अच्छा नहि लगता. ये बात गलत ही नहि पर समाज के लिये, रिश्तों के लिये भी बूरी है.


शिक्षक क्या है? उसे जो मानधन मिलता है उसकी तुलना में वो विद्यार्थीयों को जो ज्ञान बांटता है उसका मूल्य अनेक गुना ज्यादा होता है. शिक्षक भले ही अपना कार्य करता है लेकिन साथ में वो परमार्थ भी कर ही देता है. आज की दुनिया में लेकिन ऐसे बहूत कम व्यवसाय बचे है, ऐसे बहूत कम कर्म बचे है जो मानवता सीखाने के साथ साथ जीने की राह भी हमे दिखाए. कोई बात नहि. उन नदीयों से, पेड-पौधों से, बादलों से हम चाहे तो सीख सकते है.

संत कबीरजी ने काफी सुंदर बात कही है. उन्होने कहा है कि जिस तरह नाव में पानी भर जाए उसके पहले उसे बाहर फेंक देना चाहिए, उसी तरह घर में धन भर जाए उसके पहले उसे बांट देना चाहिए. बांटोगे तो कुछ ऐसा पाओगे जो सिर्फ भाग्यशाली लोगों को मिलता है. और वो है मानसिक सुख, परम शांति और जीवन में कुछ असाधारण करने का संतोष.

मित्रों के साथ, परिवारजनो के साथ, सहकर्मचारी और साथी विद्यार्थीओं के साथ, प्रत्येक संबंध में, संजोग में और समय में मन में किसी के लिये कुछ करने की इच्छा रहनी ही चाहिए. किसी के लिये कुछ भले कार्य करने ही चाहिए, और उसके बदले में कुछ पाने की इच्छा भी नहि करनी चाहिए. विश्व के सबसे श्रीमंत लोगों में जिनका स्थान है वैसे बिल गॅट्स और वॉरन बफॅ ने भी अपनी अपार संपत्ति का सबसे बडा हिस्सा समाजसेवा और सदकार्य में लगा दिया है. जिस समाज से उन्होने धन उपार्जन किया उसी पर उसका अधिकार है ये भावना को दोनो ने उजागर किया है. हमे भी यथा शक्ति ये भाव रखना ही है. आखिर तभी तो इश्वर का दिया जीवन सार्थक और संपूर्ण होगा!
(photo courtesy: http://blogs.mysanantonio.com/weblogs/althealth/Spotlight.JPG)

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