सोचो ये दुनिया क्या होती
अगर भगवान के जैसी मां न होती?
उसके हाथों की लकीरें
जिम्मेदारीओं का बोज़ ढहकर
न जाने कब मिट जाती है
पर ऐसा करते करते वो
संतान के हाथों की लकीरों को
सुख्-समॄद्धि से भर देती है…
अपनी जवानी खोकर मां
हमको बचपन देती है
खुद बुढी हो जाती है हमको
खुशहाल जवानी देती है
और एक मकान को घर बनाकर
खुद उस घर के एक कोने में
बिना कोई फरियाद किये
बस बैठे रहती है
कुछ ऐसे जैसे
मंदिर में भगवान की मूरत रहती है…

Photo courtesy – http://colorfulideas.in/wp-content/uploads/2009/08/mother_child_79.jpg)

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