Hindi Rankaar

सोचा भी है कि क्या सोचना है?

संजय वि. शाह नाक और दिमाग में कुछ कमाल की साम्यताएं है. दोनों बहूत ही महत्त्वपूर्ण अंग है लेकिन दोनों को मेनेज करने को न्यूनतम कष्ट उठाना पडता है. जागते रहो या सो जाओ, नाक सांसे लेते ही रहेगा. चाहो या ना चाहो, दिमाग कुछ ना कुछ सोचते ही रहेगा. सोचने में दिमाग का आखिर...

जीवन सार्थक और संपूर्ण होगा! (Hindi Rankaar)

रणकार संजय वि. शाह नदी कभी अपना पानी पीती नहि है. ना कभी कोई वृक्ष अपने ही उगाए फल खाता है. बारिश जो दाने उगाती है उसे कभी मांगती नहि. ये सब वो दानवीर है जो सिर्फ देना जानते है और बदले में कुछ पाने की आशा रखते नहि है. सच्चे धनवान भी वो ही...

बुद्धि का प्रयोग

रणकार ऐसा माना जाता है कि बुद्धि का प्रयोग करने से हर समस्या का निवारण मिल जाता है, मिल सकता है. पर ये बात शत प्रतिशत सच नहि है. कभी कभी ऐसा भी होता है कि बुद्धि का प्रयोग करने से समस्या का निवारण नहि भी मिल पाता है. मान लिजिए कि ट्रॅन में आप...

विरोधाभास

रणकार कैसा विरोधाभास प्रवर्तमान है ईस जगत में! कम्प्युटर के लिये जो चाहिए वो सीडी़ की कीमत सिर्फ दस रूपये. रॅस्टॉरां में जो मिलता है वो ज्युस का एक ग्लास चालीस रूपये का! महंगाई ने टॅक्नॉलोजी को बेहद सस्ता कर दिया है और एक वक्त के खाने को आश्चर्यचकित कर दे उतना महंगा. आम आदमी...

hindi rankaar 28 09 2009

हिन्दी रणकार चाहे समज में आये या ना आये, और अगर याद रहे या ना रहे, छोटे बच्चों को हर नयी फिल्म का हर नया गाना याद रह ही जाता है. भले फिर उन्हे ये गीत कुछ ही समय और कुछ ही दिन के लिये याद रहे, या अच्छे लगे. हॅमरिंग यानि कि बार बार...

rankaar 30 09 2009

रणकार सचीन तेंडुलकर, राहुल द्रविड, सुनील गावसकर… देश और दुनिया के बडे़ बडे़ क्रिकॅटर्स को लोगो ने शून्य रन बनाकर आउट होते हुए देखा है. कितने चपल, विचारशील, चॅम्पियन और महान कक्षा के होने के बावजुद ईन खिलाडीओं को हमने एक भी रन बनाए बिना आउट होते देखा है. किसीके भी साथ ऐसा हो सकता...

देश

रणकार भारतीय ईन्सान कैसे है? पचास लाख रूपये की पॉश कार में घूमे-फिरे फिर भी जब उस में से उतरेंगे तब बडी़ जो़र से, पटक के उसका दरवाजा़ बंद करेंगे वैसे. या फिर प्रति स्क्वॅअर फूट २२,००० के घर में रहेंगे फिर भी घर की बालकनी में तरह तरह के कपडो़ के साथ सफाई के...

एक मिनट…

रणकार एक मिनट. घडी़ की निरंतर चलती टिकटिक में एक मिनट का समय कितना छोटा सा है! या फिर कितना लंबा है? वैसे तो समय अपने आप में कभी छोटा या लंबा नहि होता है. समय को जीने वाले की समय के बारे में सोच-समज़ ही समय की लंबाई, गहराई या उसकी कमी तय करती...

Chitika!

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